यह कहानी 25 साल के महेश की है | महेश ने भारत के प्रसिद्ध तकनीकी विद्यालय आई आई टी से स्नातक करने के पश्चात् प्रख्यात आई आई एम से एम सी ए की शिक्षा पूर्ण की | आई आई एम में आई कंपनियों की चयन परीक्षा में सफल होने के बाद महेश को नौकरी मिल गई | घर में ख़ुशी की लहर दौड़ गई | महेश के माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं था | कंपनी में शामिल होने के पत्र का बेसब्री से सबको इंतज़ार था | सोशल मीडिया पर महेश के दोस्त उसको बधाई दे रहे थे | किन्तु यह हर्ष केवल कुछ दिनों तक टिका रहा |

एक दिन डाकिया अपने संग कंपनी की चिठ्ठी लाया | महेश ने बड़ी उत्सुकता से चिट्ठी खोली पत्र पढ़ते ही वह उदास हो गया | माता-पिता के पूछे जाने पर महेश ने बताया कि आर्थिक मंदी के कारण कम्पनी ने उसकी नौकरी रद्द कर दी है | महेश के पिता बहुत सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति थे | उन्होंने महेश से कहा, ” हिम्मत मत हारो बेटा | ” अब तुमको अपने लिये खुद नौकरी तलाशनी होगी | किन्तु मेंहनत और लगन से कुछ भी सम्भव है | महेश की माँ ने भी इस बात का समर्थन किया | महेश यह सब सुनकर बोला “जी पिताजी, मैं फिर से मेंहनत करूंगा |” कुछ हफ्तों की कड़ी खोज के बाद महेश को एक स्टार्ट-अप में नौकरी का अवसर मिला| महेश ने यह नौकरी पूर्ण निष्ठां के साथ की और आज वह अपने क्षेत्र का सफल व्यवसायी है|

कहानी का सार: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी परेशानी ज्यादा देर तक परेशान नहीं कर सकती | धैर्य एव श्रम से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है | हमें हर अवस्था में सकरात्मक सोच रखनी चाहिए |

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